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थीं बनात-उन-नाश-ए-गर्दुं दिन को पर्दे में निहाँ शब को उन के जी में क्या आई कि उर्यां हो गईं

The Banat-un-Naash (Ursa Major) of the sky were veiled by day and out of sight; What whim possessed them that they chose to be bare, unveiled at night?

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

दिन में بنات-उन-नाश-ए-गर्दुं (सप्तर्षि के तारे) परदे में छिपे हुए थे। रात को उनके मन में क्या आया कि वे प्रकट हो गए।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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