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ले ज़मीं से आसमाँ तक फ़र्श थीं बेताबियाँ शोख़ी-ए-बारिश से मह फ़व्वारा-ए-सीमाब था

From earth to sky, restlessness formed a carpet wide,The moon, a fountain of quicksilver, by rain's mischief plied.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

ज़मीन से आसमान तक बेचैनियाँ कालीन की तरह बिछी थीं। बारिश की शरारत से चाँद पारे का फ़व्वारा बन गया था।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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