कल 'असद' को हम ने देखा गोशा-ए-ग़म-ख़ाना में
दस्त-बरसर सर-ब-ज़ानू-ए-दिल-ए-मायूस था
“Yesterday we saw Asad in a corner of sorrow's dwelling,His hand on his head, head on the knee of a despairing heart.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
कल हमने असद को गम के घर के कोने में देखा। वह अपना हाथ सिर पर रखे, अपना सिर एक निराश हृदय के घुटने पर टिकाए बैठा था।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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