शबनम ब-गुल-ए-लाला न ख़ाली ज़-अदा है
दाग़-ए-दिल-ए-बेदर्द नज़र-गाह-ए-हया है
“The dew on the tulip is not free from its graceful guise,A mark on a callous heart is a sight for shame's eyes.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
ट्यूलिप के फूल पर ओस की बूँद अपनी अदा (शोभा) से खाली नहीं है। एक बेदर्द दिल पर लगा दाग़ शर्म का विषय होता है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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