बू-ए-गुल फ़ित्ना-ए-बेदार-ओ-चमन जामा-ए-ख़्वाब
वस्ल बर रंग-ए-तपिश किसवत-ए-रुस्वाई है
“The rose's scent, an awakened strife; the garden, a garment of sleep.Union, in its restless fever, is a robe of disgrace deep.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
गुलाब की खुशबू एक जागी हुई शरारत है, जबकि बाग नींद का लिबास है। मिलन, अपनी बेचैनी की गर्मी में, बदनामी का पहनावा है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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