बे-सर्फ़ा ही गुज़रती है हो गरचे उम्र-ए-ख़िज़्र
हज़रत भी कल कहेंगे कि हम क्या किया किए
“Even if it is the lifespan of Khizr, it passes without purpose;Tomorrow, even he will ask, "What did I ever do?"”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
अगर ख़िज़्र की सी लंबी उम्र भी मिल जाए तो भी वो बेकार ही गुज़र जाती है, कल ख़िज़्र भी कहेंगे कि हमने क्या किया।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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