ताक़त-ए-रंज-ए-सफ़र भी नहीं पाते उतनी
हिज्र-ए-यारान-ए-वतन का भी अलम है हम को
“We do not find enough strength for the pains of travel,And we also bear the grief of separation from homeland friends.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
हमें सफ़र की मुश्किलों को सहने की उतनी ताक़त भी नहीं मिलती, और हमें वतन के दोस्तों से बिछड़ने का ग़म भी है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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