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मिरे अशआ' 'इक़बाल' क्यूँ प्यारे हों मुझ को मिरे टूटे हुए दिल के ये दर्द-अंगेज़ नाले हैं

My poems, O Iqbal, why aren't they dear to me? / These streams of pain from my broken heart are too much.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

मेरे अशआर ऐ 'इक़बाल', क्यूँ प्यारे न हों मुझ को। मेरे टूटे हुए दिल के ये दर्द-अंगेज़ नाले हैं।

विस्तार

दोस्तों, यह शेर सिर्फ़ शायरी नहीं है, यह एक शायर की आत्मा की बात है। शायर कह रहे हैं कि मेरे लिखे हुए शेर... मुझे खुद प्यारे क्यों नहीं लगते? क्योंकि ये अशआर किसी बाहरी खुशी से नहीं आए हैं। ये तो मेरे टूटे हुए दिल के दर्द से निकले नाले हैं! यानी, जब आप दर्द को ही अपनी कला बना लेते हैं, तो वह आपको खुशी नहीं दे सकती।

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