मुझे तहज़ीब-ए-हाज़िर ने अता की है वो आज़ादी
कि ज़ाहिर में तो आज़ादी है बातिन में गिरफ़्तारी
“The decorum of the present moment has granted me freedom, / That in appearance, there is liberty, but within, there is imprisonment.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
मुझे वर्तमान के शिष्टाचार ने वह आज़ादी दी है, कि बाहर से तो आज़ादी है, पर अंदर से क़ैदखाना है।
विस्तार
यह शेर आज की ज़िंदगी के एक गहरे विरोधाभास को दिखाता है। शायर कहते हैं कि मौजूदा सभ्यता ने उन्हें एक अजीब आज़ादी दी है। बाहर से देखने पर हम आज़ाद हैं—बोलने की आज़ादी, चलने की आज़ादी। लेकिन अंदर ही अंदर, आत्मा एक पिंजरे में कैद है। यह शेर बाहरी दिखावे की आज़ादी और अंदरूनी, रूहानी क़ैदगी के बीच के अंतर को समझाता है।
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