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फ़रंग में कोई दिन और भी ठहर जाऊँ मिरे जुनूँ को संभाले अगर ये वीराना

In a foreign land, if this wilderness can sustain my passion, I might linger for another day.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

परदेस में कोई दिन और भी ठहर जाऊँ, अगर यह वीराना मेरे जूनून को संभाले।

विस्तार

यह शेर जुनून और तन्हाई के रिश्ते को समझाता है। शायर कह रहे हैं कि उन्हें किसी परदेश (foreign land) में भी रुकने को तैयार हैं.... बशर्ते कि यह वीराना, मेरा जुनूँ, मेरे इस पागलपन को संभाल सके। यह एक गहरा एहसास है कि कभी-कभी हमें किसी जगह या इंसान से नहीं, बल्कि अपने अंदर के जुनून को किसी चीज़ से सह-अस्तित्व में रखना होता है। यह खुद की भावना को स्वीकार करने की बात है!

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