“Far better than the path of blind imitation is self-ruin; seek your own way forward, and abandon your reliance on Khizr.”
अंधी नक़ल करने के रास्ते पर चलने से बेहतर तो ख़ुदकुशी करना है; अपना रास्ता ख़ुद तलाश करो और ख़िज़्र जैसे रहनुमा का सहारा लेने का ख़्याल छोड़ दो।
इस शेर में इक़बाल हमें दूसरों की अंधी पैरवी छोड़कर अपनी राह खुद बनाने का हौसला देते हैं। वे हज़रत ख़िज़्र का ज़िक्र करते हैं, जो मुसाफ़िरों को रास्ता दिखाने के लिए मशहूर हैं, पर शायर का मानना है कि किसी रहनुमा के भरोसे बैठना अपनी पहचान खोने जैसा है। अपने रास्ते खुद तलाशना और ठोकरें खाकर सीखना ही असल ज़िंदगी है, क्योंकि दूसरों की नकल करना रूह की मौत के बराबर है।
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