“My cupbearer has wiped away the world of my heart and mine, By giving me the intoxication of 'There is no god but God.'”
मेरे साक़ी ने मेरे मन और तेरे मन का आलम मिटा दिया, और मुझे 'ला इलाहा इल्ला मुहम्मद' (या 'ला इलाहा इल्ला हु') का मय पिला दिया।
यह शेर आत्म-विस्मरण और परमात्मा के प्रेम की मदहोशी को बयां करता है। शायर कह रहे हैं कि उनके साक़ी (इश्क़) ने जब उन्हें 'ला इलाहा इल्लल्लाह' की मय पिला दी... तो उन्होंने उनके मन का सारा आलम, यानी उनका सारा नफ़्स और अहंकार, मिटा दिया। यह सिर्फ़ इश्क़ नहीं है, बल्कि एक ऐसी रूहानी हालत है जहाँ इंसान खुद को पूरी तरह से अल्लाह की एकता में खो देता है! यह तसव्वुफ़ की पराकाष्ठा है।
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