हदीस-ए-बादा-ओ-मीना-ओ-जाम आती नहीं मुझ को न कर ख़ारा-शग़ाफ़ों से तक़ाज़ा शीशा-साज़ी का

“The lore of wine, flagon, and cup is unknown to me; demand not of stone-cleavers the delicate craft of glass.”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

मुझे शराब, सुराही और प्याले की बातें नहीं आतीं। पत्थर काटने या तोड़ने वालों से शीशा बनाने की उम्मीद मत करो।

विस्तार

इस शेर में शायर अपनी सख्त और जुझारू तबीयत को बड़े खूबसूरत अंदाज़ में पेश कर रहा है। शराब, सुराही और जाम जैसी चीजें ऐशो-आराम और नज़ाकत की नुमाइंदगी करती हैं, जबकि 'ख़ारा-शगाफ़' उस इंसान को कहते हैं जो सीना चीरकर चट्टानों का रास्ता बनाए। शायर साफ लफ़्ज़ों में कहता है कि जो शख्स जिंदगी की कठोर सच्चाइयों और संघर्ष से जूझने का दम रखता हो, उससे कांच जैसी नाजुक बातें और नफासत बरतने की उम्मीद मत रखिए।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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