तिरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँ मिरी सादगी देख क्या चाहता हूँ

“I seek the utmost culmination of your love; behold my innocence, look what I dare to crave!”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

मैं तुम्हारे प्रेम की अंतिम सीमा (इंतिहा) तक पहुँचना चाहता हूँ; ज़रा मेरा भोलापन तो देखो कि मैं कैसी नामुमकिन चीज़ की चाहत रख रहा हूँ।

विस्तार

इस शेर में आशिक़ अपने महबूब के इश्क़ की आख़िरी हद तक पहुँचने की ख़्वाहिश रखता है, जबकि इश्क़ तो एक ऐसा असीम समंदर है जिसका कोई छोर नहीं होता। वह खुद अपनी इस मासूमियत पर मुस्कुराता है कि देखो, मैं कितनी बड़ी और नामुमकिन चीज़ मांग बैठा हूँ। यह दीवानगी और सादगी का वो खूबसूरत संगम है, जहाँ दिल मोहब्बत में हर सीमा को पार कर जाना चाहता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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