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कबीर यह जग कुछ नहीं , खिन खारा मीठकाल्ह जो बैठा भण्डपै , आज भसाने दीठ174

Kabir, this world is nothing but bitter and sweet. Yesterday, who sat in the granary, today has been thrown out.

कबीर
अर्थ

कबीर कहते हैं कि यह संसार न तो कड़वा है और न ही मीठा। कल जो व्यक्ति भंडार में बैठा था, आज उसे बाहर फेंक दिया गया है।

विस्तार

कबीर दास जी इस दोहे में कितनी सीधी बात कहते हैं कि ये दुनिया बस एक पल मीठी तो अगले ही पल कड़वी लगने लगती है, इसमें कोई स्थिरता नहीं। वे भण्डार (अनाज का गोदाम) के उदाहरण से समझाते हैं कि जो कल तक खूब शानो-शौकत में बैठा था, जिसे हर सुख-सुविधा हासिल थी, आज उसे ऐसी नज़र से देखा जा रहा है जैसे सब कुछ मिट्टी में मिल गया हो। यह हमें याद दिलाता है कि दुनिया की दौलत, पद और सम्मान सब कुछ पल भर का है, इसलिए इन पर ज़्यादा इतराना ठीक नहीं।

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