दुर्लभ मानुष जन्म है , देह न बारम्बार। तरुवर ज्यों पत्ती झड़े , बहुरि न लागे डार॥ 22॥
“This human birth is rare, a body not repeatedly gained. Like leaves falling from a tree, it does not return again.”
— कबीर
अर्थ
मानव जन्म दुर्लभ होता है और यह देह बार-बार प्राप्त नहीं होती। जैसे पेड़ से पत्ती झड़ जाती है, वैसे ही यह जीवन एक बार ही मिलता है।
विस्तार
यह दोहा हमें मनुष्य जीवन के अनमोल होने की याद दिलाता है। कबीर दास जी कहते हैं कि मनुष्य का जन्म दुर्लभ है और यह शरीर बार-बार नहीं मिलता। वे पेड़ से पत्तों के झड़ने का सुंदर बिम्ब प्रयोग करते हैं, यह समझाने के लिए कि जैसे एक बार पत्ता डाल से टूट जाए तो वापस नहीं लगता, वैसे ही यह जीवन भी एक बार चला गया तो लौटकर नहीं आता। इसलिए हमें इस जीवन का सदुपयोग करना चाहिए।
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