“Giving away wealth does not diminish it, just as a river does not diminish its water. Look into your own eyes and see, why do you say this, Kabir?”
दान देने से धन कम नहीं होता, ठीक वैसे ही जैसे नदी का जल कम नहीं होता। अपनी आँखों से देखो, और बताओ कि ऐसा क्यों कह रहे हो, शायर।
कबीर दास जी कितनी खूबसूरती से कहते हैं कि जैसे नदी अपना पानी देने से कभी खाली नहीं होती, वैसे ही दान देने से हमारा धन कभी घटता नहीं है। यह एक गहरा विचार है कि सच्चा दान कभी कम नहीं होता, बल्कि बढ़ता ही है, यह तो प्रकृति का नियम है। फिर वो हमें अपनी ही आँखों में देखने को कहते हैं, मानो पूछ रहे हों कि अगर यह सच है, तो तुम क्यों कमी या अभाव की बात करते हो? यह हमें बाहरी मोह-माया से हटकर भीतर की समृद्धि को पहचानने की सीख है।
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