कुटिल वचन सबसे बुरा , जारि कर तन हार। साधु वचन जल रूप , बरसे अमृत धार॥ 36॥
“Curved speech is the worst, it can destroy the body. The word of a saint is like water, showering nectar.”
— कबीर
अर्थ
टेढ़े-मेढ़े वचन सबसे बुरे होते हैं, ये शरीर को नष्ट कर देते हैं। साधु का वचन पानी के रूप में होता है, जो अमृत की धारा बरसाता है।
विस्तार
कबीरदास जी इस दोहे में समझाते हैं कि कड़वे और धोखे भरे बोल कितने हानिकारक होते हैं; ये तो ऐसे हैं जैसे शरीर को ही जलाकर राख कर दें। वहीं, संत-महात्माओं के मीठे और सच्चे वचन पानी की तरह होते हैं, जो अमृत की धार बरसाकर हमें शांति और जीवन देते हैं। यह हमें सिखाता है कि हमारी ज़ुबान से निकले हर शब्द में या तो ज़हर होता है या फिर जीवन देने वाला मीठा पानी।
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