Sukhan AI
केते पढ़ि गुनि पचि भुए , योग यज्ञ तप लायबिन सतगुरु पावै नहीं , कोटिन करे उपाय477

How many books have you read, how many sacrifices made, or how much asceticism practiced? Without the True Guru, one cannot find it, no matter how many remedies are employed.

कबीर
अर्थ

कितनी किताबें पढ़ीं, कितने यज्ञ किए, या कितना तप किया? बिना सच्चे गुरु के, यह पाना संभव नहीं, चाहे कितने भी उपाय किए जाएं।

विस्तार

कबीर दास जी यहाँ समझाना चाहते हैं कि कितनी भी किताबें पढ़ लो, कितने ही यज्ञ-तप कर लो, ये सब बाहरी उपाय सच्चे ज्ञान तक नहीं ले जा सकते। वे कहते हैं कि बिना सद्गुरु की कृपा और मार्गदर्शन के, आत्मज्ञान की प्राप्ति असंभव है, चाहे हम लाखों यत्न क्यों न कर लें। यह दोहा हमें याद दिलाता है कि असली मंजिल बाहरी कर्मकांडों में नहीं, बल्कि गुरु द्वारा दिखाए गए भीतर के मार्ग को पहचानने में है।

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थIn app
अंग्रेज़ी अर्थIn app
हिंदी विस्तारIn app
अंग्रेज़ी विस्तारIn app
Comments

Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.

0

No comments yet.

← Prev74 / 10