जग सब सागर मोहिं , कहु कैसे बूड़त तेरे। गहु सतगुरु की बाहिं जो जल थल रक्षा करै॥ 482॥
“All the world is an ocean, O Beloved, how can one drown in you? Only by the embrace of the True Guru can one be protected from water and land.”
— कबीर
अर्थ
जग सारा सागर के समान है, प्रिय! यह बताओ कि इसमें डूबना कैसे संभव है? केवल सतगुरु की बाहों में ही जल और थल से रक्षा मिल सकती है।
विस्तार
कबीर दास जी यहाँ दुनिया को एक विशाल सागर की तरह देखते हैं, जहाँ जीवन की लहरें और चुनौतियाँ हमें कभी भी डुबो सकती हैं। वे कहते हैं कि इस अथात सागर से पार पाने का रास्ता केवल सच्चे गुरु की शरण में है। जब हम गुरु का हाथ थाम लेते हैं, तो उनकी कृपा हमें जल और थल, यानी हर तरह के सांसारिक बंधनों और खतरों से बचाती है। यह दोहा हमें गुरु के महत्व और उनकी सुरक्षा का सुंदर पाठ सिखाता है।
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