Sukhan AI
ग़ज़ल

कबीर 491-497

کبیر 491-497
कबीर· Ghazal· 7 shers

कबीर सच्चे गुरु के महत्व पर जोर देते हुए कहते हैं कि गुरु वह है जो 'गु' (अज्ञान रूपी अंधकार) को मिटाकर 'रु' (ज्ञान रूपी प्रकाश) देता है। वे चेतावनी देते हैं कि अज्ञानी गुरु अपने शिष्यों को भटकाते हैं, इसलिए शिष्य को मन को स्थिर कर आध्यात्मिक शांति प्राप्त करने के लिए गुरु के गहन ज्ञान को समझना चाहिए।

गाने लोड हो रहे हैं…
00
1
कबीर बेड़ा सार का , ऊपर लादा सारपापी का पापी गुरु , यो बूढ़ा संसार494
कबीर के बेड़े का सार, ऊपर लाद दिया गया। पापी का पापी ही रहता है, हे यह पुराना संसार।
2
जो गुरु को तो गम नहीं , पाहन दिया बतायशिष शोधे बिन सेइया , पार पहुँचा जाए495
जो व्यक्ति गुरु और भगवान का ज्ञान नहीं रखता, वह जीवन के सागर को पार नहीं कर सकता।
3
सोचे गुरु के पक्ष में , मन को दे ठहरायचंचल से निश्चल भया , नहिं आवै नहीं जाय496
गुरु के पक्ष में विचार करने से मन स्थिर हो गया। चंचल मन निश्चल हो गया, जो आता है और जाता है, वह अब नहीं होता।
4
गु अँधियारी जानिये , रु कहिये परकाशमिटि अज्ञाने ज्ञान दे , गुरु नाम है तास497
हे अंधियारी जानिये, मैं पुकारता हूँ प्रकाश। मिटा अज्ञान और दे ज्ञान; यही गुरु का नाम है।
5
गुरु नाम है गम्य का , शीष सीख ले सोयबिनु पद बिनु मरजाद नर , गुरु शीष नहिं कोय498
गुरु का नाम ही अंतिम गंतव्य है; हे साधक, इसे उनसे सीख लो। ऐसा व्यक्ति जिसका कोई पद या सम्मान नहीं है, वास्तव में उसका कोई गुरु नहीं होता।
6
गुरुवा तो घर फिरे , दीक्षा हमारी लेहकै बूड़ौ कै ऊबरो , टका परदानी देह499
गुरुवा तो घर फिरे, दीक्षा हमारी लेह। कै बूड़ौ कै ऊबरो, टका परदानी देह॥ इसका शाब्दिक अर्थ है कि हमारी दीक्षा गुरुवा के घर भटक गई है। चाहे बूढ़ी औरत दे या जवान औरत, एक छोटे से सिक्के के लिए क्या भेंट दी जाएगी।
7
गुरुवा तो सस्ता भया , कौड़ी अर्थ पचासअपने तन की सुधि नहीं , शिष्य करन की आस500
गुरु का महत्व बहुत कम हो गया है, जिसकी कीमत केवल पचास कौड़ियाँ है। आप अपने शरीर का ध्यान नहीं रखते, बल्कि केवल शिष्य बनने की इच्छा रखते हैं।
Comments

Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.

0

No comments yet.

कबीर 491-497 | Sukhan AI