जा करण जग ढ़ूँढ़िया , सो तो घट ही मांहि। परदा दिया भरम का , ताते सूझे नाहिं॥ 70॥
“Whatever the world I search for, it is in the very heart. But covered by the illusion, it cannot be seen.”
— कबीर
अर्थ
जो कुछ भी जग में खोजा जाए, वह वास्तव में हृदय में ही होता है। पर भ्रम के पर्दे के कारण उसे देखा नहीं जा सकता।
विस्तार
कबीर जी हमें समझाते हैं कि जिस सच्चाई को हम पूरी दुनिया में खोजते फिरते हैं, वह हमारे अपने दिल में ही मौजूद है। हमारा हृदय ही वह पूरी कायनात है जहाँ जीवन का सार छिपा है। पर भ्रम का पर्दा हमारी आँखों पर ऐसा छा गया है कि हम उस भीतरी प्रकाश को देख ही नहीं पाते। यह दोहा हमें बाहरी खोज छोड़कर अपने भीतर झाँकने और आत्म-मंथन करने की राह दिखाता है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
← Prev67 / 10
