दुख में सुमरिन सब करे , सुख मे करे न कोय। जो सुख मे सुमरिन करे , दुख काहे को होय॥
“When in sorrow, everyone remembers (or praises), but in happiness, no one does. If you remember (or praise) during happiness, why should sorrow come?”
— कबीर
अर्थ
दुःख में सभी सुमरन करते हैं, सुख में कोई नहीं। जो सुख में सुमरन करेगा, दुःख क्यों होगा।
विस्तार
यह दोहा हमें जीवन का एक बहुत ही गहरा सबक सिखाता है। कबीरदास जी कहते हैं कि जब हम दुखी होते हैं, तो हर कोई ईश्वर को याद करता है या उनसे मदद मांगता है, लेकिन सुख के दिनों में हम अक्सर उन्हें भूल जाते हैं। यदि हम खुशी के पलों में भी ईश्वर को स्मरण करते रहें और कृतज्ञ रहें, तो दुख हमें कभी छू भी नहीं पाएगा। यह हमें सिखाता है कि हमेशा एक जैसी आस्था और संतोष रखना कितना महत्वपूर्ण है।
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