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सुख मे सुमिरन ना किया , दु: में किया यादकह कबीर ता दास की , कौन सुने फरियाद

Neither in times of ease did I remember Him, nor in times of sorrow. Kabir says to this servant, who will listen to my lament?

कबीर
अर्थ

सुख के समय सुमिरन नहीं किया, और दुःख में किया याद। कबीर कहते हैं इस दास से, कौन सुने मेरी फ़रियाद।

विस्तार

कबीर दास जी यहाँ हम इंसानों की एक बहुत गहरी आदत पर रोशनी डाल रहे हैं। वे कहते हैं कि जब सब अच्छा चल रहा होता है, तब हम ईश्वर को भूल जाते हैं, और जब मुसीबत आती है, तभी हमें उनकी याद आती है। यह एक तरह का स्वार्थ है जहाँ हम भगवान को केवल अपनी ज़रूरतों के लिए याद करते हैं, न कि प्रेम और श्रद्धा से। कबीर जी सवाल करते हैं कि ऐसे भक्त की फरियाद भला कौन सुनेगा, जो सिर्फ़ मुश्किल में ही याद करता है।

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