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अटकी भाल शरीर में तीर रहा है टूटचुम्बक बिना निकले नहीं कोटि पटन को फ़ूट42

A bowstring is stuck in the body, it is tearing. Without a magnet, it cannot tear apart the city of a million towns.

कबीर
अर्थ

शरीर में फंसा हुआ धनुष का तार टूट रहा है। चुंबक के बिना यह एक करोड़ नगरों को फाड़ नहीं सकता।

विस्तार

कबीरदास जी इस दोहे में बताते हैं कि हमारे भीतर एक अद्भुत शक्ति (जैसे शरीर में फँसी हुई डोरी) मौजूद है, पर वह अटकी हुई है और हमें भीतर से ही पीड़ा दे रही है। यह फँसी हुई ऊर्जा या चेतना तब तक बाहर नहीं निकल सकती, जब तक कोई बाहरी सहारा (चुंबक जैसा) न मिले। जैसे एक छोटा-सा चुंबक बड़े लोहे को खींच लेता है, वैसे ही ईश्वरीय कृपा या गुरु का ज्ञान हमारे अंदर की उलझनों को सुलझाकर हमें माया के करोड़ों बंधनों से मुक्त कर सकता है। यह हमें अपनी वास्तविक क्षमता को समझने और संसार के भ्रम को तोड़ने की शक्ति देता है।

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