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कामी , क्रोधी , लालची , इनसे भक्ति होयभक्ति करे कोइ सूरमा , जाति वरन कुल खोय56

Lustful, angry, greedy—by these, devotion is not achieved. Devotion is practiced by the valiant, losing caste, lineage, and clan.

कबीर
अर्थ

कामी, क्रोधी और लालची स्वभाव से भक्ति नहीं होती। सच्चे और वीर लोग भक्ति करते हुए जाति, वर्ण और कुल का त्याग कर देते हैं।

विस्तार

कबीर दास जी कहते हैं कि काम, क्रोध और लालच जैसी भावनाएँ हमें सच्ची भक्ति से दूर रखती हैं। ये सारे मोह-माया के बंधन हैं जो मन को अशांत कर देते हैं। असली भक्त तो वह शूरवीर है, जो अपनी जाति, वर्ण और कुल के अभिमान को त्याग कर सिर्फ ईश्वर में लीन हो जाता है। इसका अर्थ है कि सच्ची भक्ति पाने के लिए हमें अपने अहंकार और दुनियावी पहचान को छोड़ना पड़ता है।

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