तेरा साँई तुझमें , ज्यों पहुपन में बास। कस्तूरी का हिरन ज्यों , फिर-फिर ढ़ूँढ़त घास॥ 95॥
“Your Lord in you, like a young fawn in musk's scent, Like a deer for musk, constantly searching for grass.”
— कबीर
अर्थ
तुम्हारा सांगा (ईश्वर) तुझमें ही है, जैसे कस्तूरी की सुगंध में युवा हिरण होता है, वैसे ही वह बार-बार घास खोजता रहता है।
विस्तार
कबीर दास जी यहाँ समझाते हैं कि ईश्वर तो तुम्हारे भीतर ही निवास करते हैं, जैसे किसी फूल में उसकी अपनी खुशबू होती है। हम अक्सर उस मालिक को बाहरी दुनिया में तलाशते रहते हैं, बिलकुल उस हिरण की तरह जो अपनी ही कस्तूरी की महक को न पहचानकर उसे जंगल की घास में ढूँढ़ता फिरता है। यह दोहा हमें अपने भीतर झाँकने और सत्य को वहीं पाने की सीख देता है।
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