“Wherever you are, disaster resides, where doubt exists, disease blooms. Kabir says, why do these four obstacles perish: disease?”
जहाँ आप तहाँ आपदा, जहाँ संशय तहाँ रोग। शायर कबीर कहते हैं कि ये चारों बाधाएं (आपदा, संशय, रोग) क्यों मिटें।
कबीर दास जी यहाँ समझा रहे हैं कि जहाँ हमारे अंदर 'मैं' यानी अहंकार की भावना होती है, वहाँ मुसीबतें अपने-आप चली आती हैं। और जहाँ मन में संदेह या शक घर कर जाता है, वहाँ बीमारियाँ और परेशानियाँ पैदा होने लगती हैं। वे कहते हैं कि ये चारों बाधाएँ – अहंकार, संदेह, आपदा और रोग – दरअसल बाहर से नहीं आतीं, बल्कि हमारे अपने भीतर से ही उपजती हैं। हमें खुद को पहचानने और इन आंतरिक बंधनों को तोड़ने की राह खोजने के लिए कबीर दास जी प्रेरित कर रहे हैं।
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
