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शब-ए-हिज्र रास्त कह तुझ को बात कुछ सुब्ह की भी आती है

Oh, the night of separation, tell me truly, Something of the morning's talk also comes to me.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

ऐ जुदाई की रात, सच सच बता; क्या तुझे सुबह के बारे में भी कुछ पता है या नहीं?

विस्तार

यह शेर एक गहरे संवाद को बयां करता है... शायर रात से बात कर रहे हैं। वो रात से पूछ रहे हैं कि ऐ शब-ए-हिज्र (तन्हाई की रात), तुझे क्या पता... सुबह का हाल क्या होगा? रात यहाँ सिर्फ़ तड़प नहीं है, बल्कि वह अंधेरा है... जो यह जानना चाहता है कि यह इंतज़ार कब ख़त्म होगा! यह दर्द और उम्मीद के बीच की खींचतान है।

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