यक क़तरा आब मैं ने इस दौर में पिया है निकला है चश्म-ए-तर से वो ख़ून-ए-नाब हो कर

“I have drunk a mere drop of water in this era, / And it has emerged from the spring of my eyes as blood.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

मैंने इस युग में केवल एक बूँद पानी पी है, और वह आँसू बनकर मेरी आँखों के झरने से खून के रूप में निकला है।

विस्तार

यह शेर सिर्फ़ पानी की कमी की बात नहीं करता.... यह दिल के गहरे सूखेपन को बयां करता है। शायर कहते हैं कि इस मुश्किल दौर में मैंने सिर्फ़ एक क़तरा पानी पिया है। लेकिन असली बात दूसरी पंक्ति में है! आँसू... जो आँखों से निकले हैं, वो सिर्फ़ पानी नहीं हैं। वो तो जीवन का ख़ून हैं! इसका मतलब है कि दर्द इतना गहरा है कि वो ही हमें ज़िंदा रखे हुए है।

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