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यक बयाबाँ ब-रंग-ए-सौत-ए-जरस मुझ पे है बे-कसी-ओ-तन्हाई

Oh, the desert, the color of your voice, O Jaras Upon me, there is a loneliness that has no end.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

हे रेगिस्तान, तुम्हारी आवाज़ का रंग, ओ जरास। मुझ पर एक ऐसी तन्हाई है जिसका कोई अंत नहीं।

विस्तार

यह शेर बहुत गहरा है.... यह बताता है कि कभी-कभी खूबसूरती भी कितना दर्द दे सकती है! जारस की आवाज़, जो अपने आप में मधुर होती है, वह तन्हाई को और गहरा कर देती है। शायर कह रहे हैं कि इस आवाज़ ने एक ऐसा नज़ारा बना दिया है, कि अब दिल को बस बे-कसी का एहसास है। यह एक ऐसा दर्द है जो सिर्फ़ यादों से आता है।

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