इश्क़ हमारे ख़याल पड़ा है ख़्वाब गई आराम गया
जी का जाना ठहर रहा है सुब्ह गया या शाम गया
“My love has become a thought, a dream that went to rest; the soul's journey waits, whether it be morning or evening.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
प्रेम मेरे मन में विचार बन गया है, एक सपना जो आराम को चला गया; आत्मा का जाना ठहर रहा है, चाहे वह सुबह हो या शाम।
विस्तार
यह शेर समय और प्रेम की गहन उलझन को दर्शाता है। शायर कह रहे हैं कि ज़िंदगी का सुकून अब सिर्फ़ ख़यालों में रह गया है। वह अपनी वजूद की स्थिति पर सवाल उठा रहे हैं—क्या समय का चक्र घूम चुका है, या बस रुक गया है? यह सिर्फ़ महबूब का ज़िक्र नहीं है, बल्कि जीवन की उस बेचैनी का बयान है, जब इंसान न सुबह को पहचान पाता है, न शाम को।
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