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क्या तीर-ए-सितम उस के सीने में भी टूटे थे जिस ज़ख़्म को चीरूँ हूँ पैकान निकलते हैं

Were there any arrows of cruelty that had pierced his chest, For the wound I tear out, rivers of pain spill forth.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

क्या उसके सीने में भी सितम के कोई तीर लगे थे, कि जिस ज़ख्म को मैं चीरूँ, उससे दर्द की नदियाँ बह निकलती हैं।

विस्तार

यह शेर गहरे भावनात्मक घावों की बात करता है। शायर पूछ रहे हैं कि क्या किसी के सीने में भी सितम के तीर टूटे थे। लेकिन जवाब यह है कि घाव इतने गहरे हैं कि जब आप उन्हें कुरेदते हैं, तो वे फिर से ताज़ा हो जाते हैं। यह दर्द सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि रूहानी है। यह बताता है कि कुछ ज़ख्म कभी भरते नहीं, वे हमेशा ज़िंदा रहते हैं।

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