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मेहर-अफ़ज़ा है मुँह तुम्हारा ही कुछ ग़ज़ब तो नहीं हुआ साहब

Your face is an intoxicating delight, Has something truly magnificent happened, sir?

मीर तक़ी मीर
अर्थ

आपका मुखड़ा बहुत मदहोश कर देने वाला है, क्या साहब के साथ कुछ अद्भुत हुआ है?

विस्तार

यह शेर महबूब की बातों के जादू को बयां करता है। शायर कहते हैं कि तुम्हारा मुँह तो नेमत है, एक तरह की ख़ुशबू है। लेकिन वो पूछते हैं कि क्या कुछ ग़ज़ब हो गया है? इसका मतलब है कि आपकी बातों में इतना नशा है, कि वो नशा ही एक तरह का क़यामत जैसा है।

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