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फिर गईं आँखें तुम आन फिरे देखा तुम को भी वाह-वा साहब

Your eyes, having left, will not return to you, Oh, to see you, I exclaimed, 'Wah-Wah, sir!'

मीर तक़ी मीर
अर्थ

तुम्हारी आँखें जो चली गईं, वे वापस नहीं आएंगी। ओह, आपको देखकर मैंने 'वाह-वाह, साहब' कहा।

विस्तार

यह शेर रूह की गहराई से जुड़ा है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि आँखें, जो दिल का आईना होती हैं, वो किसी को छोड़ नहीं सकतीं। चाहे आप उन्हें कितनी भी बार भटकाने की कोशिश करें, वे वापस लौट आती हैं। यहाँ 'वाह-वाह साहब' कहना, सिर्फ़ तारीफ नहीं है... यह उस मजबूरी का इज़हार है कि दिल को किसी से दूर होना मुमकिन नहीं है।

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