“See who we may adorn with martyrdom's grace, For all are entangled by that charming sword's trace.”
देखिए किस को शहादत से सर-अफ़राज़ करें, लाग तो सब को है उस शोख़ की तलवार के साथ। इसका अर्थ है कि देखें कि किस को शहादत की गरिमा से सजाया जाए, क्योंकि वह शोख़ (चंचल/मनमोहक) तलवार का प्रभाव सभी पर पड़ रहा है।
यह शेर जीवन की व्यापक उलझन को दर्शाता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर पूछते हैं कि वह अपनी शहादत (sacrifice) किस पर करें, जब यह 'शोख़ तलवार' का खतरा हर किसी को छू चुका है। इसका मतलब है कि जब हर जगह संकट हो, तो किसी एक चीज़ के प्रति पूर्ण समर्पण करना भी नामुमकिन सा लगता है।
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