हर-दम का बिगड़ना तो कुछ अब छूटा है इन से
शायद किसी नाकाम का भी काम सँवारें
“The continuous deteriorating state has somehow departed from them; perhaps even the work of some failure will manage to restore it.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
हर पल का बिगड़ना उनसे कुछ अब छूट गया है; शायद किसी नाकाम व्यक्ति का भी काम सँवारना पड़ जाए।
विस्तार
यह बहुत गहरा शेर है जो मिर्ज़ा तक़ी मीर साहब ने लिखा है। शायर यहाँ जीवन की अस्थिरता और विरह का ज़िक्र कर रहे हैं। उनका कहना है कि हर तरह का बिगड़ना, हर तरह का टूटना... अब इन लोगों से दूर हो गया है। और ये उम्मीद भी है कि शायद किसी नाकाम इंसान का काम भी किसी तरह सँवर जाएगा। यह एक तरह की तसल्ली है कि सब कुछ ठीक होगा।
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