मुग़-बचे माल मस्त हम दरवेश
कौन करता है मुश्त-माल हमें
“O, intoxication-filled, carefree, we are the wandering ascetics; Who bothers us with our drunken, carefree state?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
शायर कहते हैं कि हम मदमस्त, लापरवाह दरवेश हैं; हमें कौन हमारे नशे और मस्ती की परवाह करता है।
विस्तार
यह शेर, साहब, दरअसल एक तरह का आत्म-मुक्ति का ऐलान है। शायर कह रहे हैं कि हम तो मस्ती में हैं, हम तो दरवेश हैं। हमारी दुनियादारी की कोई परवाह नहीं! हमें न दौलत की फिक्र है, न शोहरत की। यह बताता है कि जब इंसान का दिल सच्चा और आज़ाद होता है, तो उसे दुनिया की किसी चीज़ से लगाव नहीं रहता।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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