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थे माह-विशाँ कल जो उन कोठों पे जल्वे में है ख़ाक से आज उन की हर सहन में महताबी

The brilliance of yesterday's life in those chambers, Today, the splendor in their every breath is but dust.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

कल उन कोठों में जो जीवन की चमक थी, आज उनकी हर साँस में वह महक केवल धूल मात्र है।

विस्तार

मिर्ज़ा तक़ी मीर का यह शेर एक गहरा फ़लसफ़ा बयान करता है। शायर कहते हैं कि कल तक, चमक-दमक सिर्फ़ महँगे और आलीशान माहौल तक सीमित थी। लेकिन आज.... आज तो वह चमक, वह नूर, धूल से भी निकलकर, हर साँस में समा गया है! इसका मतलब है कि असली खूबसूरती या रौशनी किसी बाहरी शोहरत या दौलत पर निर्भर नहीं करती, बल्कि वह हमारे अंदर की सादगी और ज़िदगी में होती है।

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