ख़राबी कुछ न पूछो मुलकत-ए-दिल की इमारत की
ग़मों ने आज-कल सुनियो वो आबादी ही ग़ारत की
“Do not ask about the ruin of the structure of the heart, The sorrows have today rendered even its population desolate.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
दिल की इमारत की ख़राबी के बारे में मत पूछो, ग़मों ने आज-कल तो इसकी आबादी को ही वीरान कर दिया है।
विस्तार
यह शेर दिल के टूटने और उसके पूरी तरह से ख़ाली हो जाने का ज़िक्र करता है। शायर कहते हैं कि आप मेरी दिल की हालत के बारे में मत पूछिए, क्योंकि ग़मों ने तो इसके अंदर की पूरी आबादी को ही मिटा दिया है। यह सिर्फ़ उदासी नहीं है, बल्कि एक ऐसी भावनात्मक शून्यता है जहाँ जीवन का कोई अहसास नहीं बचा। यह मिर्ज़ा ग़ालिब के दर्द से भी गहरा, एक रूहानी तबाही का एहसास है।
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