बेगाना सा लगे है चमन अब ख़िज़ाँ में हाए
ऐसी गई बहार मगर आश्ना न थी
“The garden seems unfamiliar now in autumn's hue, Though the spring departed, a beloved was not there to see it through.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
चमन अब ख़िज़ाँ में बेगाना सा लगता है, क्योंकि जो बहार गई, उसे देखने के लिए कोई आश्ना (प्रिय) नहीं था।
विस्तार
यह शेर उस गहरे अहसास को बयां करता है जब ज़िंदगी में कोई बदलाव आता है। शायर कहते हैं कि ये चमन (बाग़) अब ख़िज़ाँ में बेगाना सा लग रहा है। उन्हें बहार का जाना दुःख नहीं दे रहा, बल्कि यह एहसास हो रहा है कि उनका कोई 'आश्ना' नहीं है। यह कविता अकेलेपन और भावनात्मक अलगाव की कहानी है।
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