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देखें वो ग़ैरत-ए-ख़ुर्शीद कहाँ जाता है अब सर-ए-राह दम-ए-सुब्ह से बैठेंगे

Where does that pride of the sun go to? Now, from the breath of dawn, they will gather at the head of the path.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

देखें वो सूरज का अभिमान कहाँ जाता है, अब राह के सर पर सुबह की साँस से आ बैठेंगे।

विस्तार

यह शेर बहुत ही शानदार तसव्वुर (imagery) से भरा है। शायर यहाँ सूरज की शान और ग़ैरत को किसी बड़ी चीज़ से जोड़ रहे हैं। इसका मतलब है कि जो चीज़ आने वाली है, वह इतनी स्वाभाविक और इतनी बड़ी है कि उसका आना खुद सुबह के सवेरे के साथ होता है। यह किसी नज़दीकी और ज़रूरी मुलाकात का एहसास कराता है।

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