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वे दिन गए कि आँसू रोते थे 'मीर' अब तो आँखों में लख़्त-ए-दिल है या पारा-ए-जिगर है

The days when tears would fall, O Mir, are gone; now, It is either the residue of the heart, or the essence of the liver in the eyes.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

वे दिन गए जब आँसू बहते थे, 'मीर', अब तो आँखों में दिल का कोई अवशेष या जिगर का कोई अंश है।

विस्तार

यह शेर गहरे दर्द की बात करता है। मीर तकी मीर कहते हैं कि रोकर जो आँसू बहते थे, वो दिन गए। अब दर्द इतना गहरा हो चुका है कि वो आँसू बनकर नहीं आता। वो तो सीधे दिल की लख़्त (निशान) बनकर रह गया है, या फिर जिगर की रग-रग में समाया एक नशा बन गया है। यह आंतरिक दर्द है!

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