ये फ़न्न-ए-इश्क़ है आवे उसे तीनत में जिस की हो
तू ज़ाहिद-ए-पीर-ए-ना-बालिग़ है बे तह तुझ को क्या आवे
“This art of love, whatever comes to it in three parts, for whom it is meant You are a novice saint, a spiritually immature one; what can come to you?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
यह इश्क़ का हुनर है जो तीन हिस्सों में आता है, जो किसी के लिए है। तुम तो एक नए साधु की तरह हो, जो आध्यात्मिक रूप से अपरिपक्व है; तुम्हें क्या आ सकता है।
विस्तार
यह शेर हमें दिखावे और हकीकत के फर्क को समझाता है। शायर कह रहे हैं कि इश्क़ का यह फ़न... यह कोई ऐसी चीज़ नहीं है जो बस रस्म-रिवाज़ से आ जाए। आप ज़ाहिद हैं, आप तपस्या करते हैं, पर अगर आपके अंदर गहराई नहीं है... तो यह फ़न आपको कैसे आ सकता है? यह एक गहरा तंज़ है, कि बाहरी दिखावे से आत्मा को नहीं बदला जा सकता।
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