ब-रंग-ए-बू-ए-ग़ुंचा उम्र इक ही रंग में गुज़रे
मयस्सर 'मीर'-साहिब गर दिल बे-मुद्दआ आवे
“The color of the fragrance of the flower, may a lifetime pass in just one hue; O Meer, if the heart comes without desire, is it achievable?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
फूल की ख़ुशबू के रंग में जीवन का एक ही रंग गुज़र जाए; ऐ मीर, अगर दिल बिना किसी इच्छा के आ जाए, तो क्या वह संभव है।
विस्तार
यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर साहब ने जीवन की नश्वरता और प्रेम की अनिश्चितता को दर्शाया है। शायर कहते हैं कि फूल की खुशबू भी कितनी क्षणभंगुर होती है, और जीवन तो बस एक रंग में गुज़र जाता है। वह यह सवाल करते हैं कि अगर उनका दिल बिना किसी उम्मीद के किसी के प्यार में पड़ जाए, तो क्या होगा? यह एक गहरी उलझन है, जहाँ खूबसूरती और नियति का सामना होता है।
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