उज़्लत से निकल शैख़ कि तेरे लिए तयार
कोई हफ़्त-गज़ी मेख़ कोई दह-वजबी है
“From disgrace, the Sheikh has prepared for you, A nail from Haft-Gazi, a torch from Dah-Wajbi.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
अपमान से निकलकर शेख आपके लिए तैयार हैं, एक हफ़्त-गज़ी की कील और दह-वजबी का मशाल।
विस्तार
यह शेर प्रेम की पराकाष्ठा को दिखाता है। शायर कहते हैं कि महबूब की चाहत इतनी बड़ी है कि शायर अपनी इज़्ज़त और शान को भी त्यागने को तैयार है। यह इश्क़ नहीं, एक इबादत है! वो कहते हैं कि चाहे कितना भी बड़ा त्याग करना पड़े.... चाहे कोई बड़ी तपस्या हो... वह तुम्हारे लिए हर चीज़ कुर्बान कर देगा।
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