फ़िक्र को नाज़ुक ख़यालों के कहाँ पहुँचे हैं यार
वर्ना हर मिस्रा यहाँ मा'शूक़ शोख़-ओ-शंग है
“Where have you taken these fragile thoughts, my friend, For every line here, the beloved is playful and coquettish.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
दोस्त, तू इन नाज़ुक विचारों को कहाँ ले गया है? वरना यहाँ हर पंक्ति में महबूब बहुत शरारती और चंचल है।
विस्तार
यह शेर बताता है कि महबूब की यादें कितनी गहरी और असरदार होती हैं। शायर कहते हैं कि मेरे ख़यालों के सबसे नाज़ुक कोनों तक भी फ़िक्र पहुँच गई है, यानी महबूब का असर हर जगह है। ऐसा लगता है जैसे महबूब ने अपनी मस्ती से हर एक विचार को अपना बना लिया है! यह इश्क़ के उस आलम का बयान है, जहाँ महबूब हर पल, हर विचार में मौजूद होता है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
