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ख़ंजर-ब-कफ़ वो जब से सफ़्फ़ाक हो गया है मुल्क इन सितम-ज़दों का सब पाक हो गया है

Since the dagger-bearer-of-the-hands has become the butcher, This country of oppressors has become purified.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

ख़ंजर-ब-कफ़ वो जब से सफ़्फ़ाक हो गया है, मुल्क इन सितम-ज़दों का सब पाक हो गया है। इसका शाब्दिक अर्थ है कि जिस समय खंजर-ब-कफ़ (हाथों का खंजर उठाने वाला) एक जल्लाद बन गया है, उस समय इन अत्याचारियों के देश का सब कुछ पाक हो गया है।

विस्तार

यह शेर सिर्फ़ एक हथियार की बात नहीं करता, बल्कि न्याय और बदलाव की बात करता है। 'ख़ंजर-ए-कफ़' यहाँ सिर्फ़ एक तलवार नहीं है, बल्कि क्रांति की भावना है। जब यह भावना खुद पवित्र हो जाती है, जब इसका उद्देश्य पाक हो जाता है... तो शायर कहते हैं कि पूरा मुल्क अपने सारे ज़ुल्म और सितम से पाक हो जाता है! यह एक बहुत गहरा फ़लसफ़ा है।

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