समझे थे 'मीर' हम कि ये नासूर कम हुआ
फिर उन दिनों मैं दीदा-ए-ख़ूँ-बार नम हुआ
“We had thought, 'Mir,' that this chronic wound would subside, But in those days, I saw the spectacle of blood again.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
हमने सोचा था, 'मीर', कि यह पुराना ज़ख्म भर गया होगा, लेकिन उन दिनों मैंने फिर खून का नज़ारा देखा।
विस्तार
यह शेर उस एहसास को बयान करता है जब आपको लगता है कि घाव भर गया है, लेकिन सच्चाई कुछ और ही होती है। शायर कहते हैं कि उन्हें लगा था कि उनका नासूर, उनका गहरा दर्द, कम हो गया है। मगर फिर एक दिन उन्होंने खून से सना रुमाल देखा, और समझ गए कि यह दर्द कभी खत्म नहीं होगा। यह दिल टूटने के उस स्थायी दर्द का वर्णन है।
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