यक निगह को वफ़ा न की गोया
मौसम-ए-गुल सफ़ीर-ए-बुलबुल था
“As if I had not kept faith with my own eyes, I was the season of flowers, the ambassador of the nightingale.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
जैसे मैंने अपनी आँखों से वफ़ा नहीं रखी, मैं फूलों का मौसम और बुलबुल का दूत था।
विस्तार
यह शेर उस गहरे दर्द को बयां करता है, जब सबसे खूबसूरत पल भी धोखा दे जाते हैं। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि वो महफ़िल, वो वक़्त... वो फूलों का मौसम था, और बुलबुल का मधुर तराना भी साथ था। मगर इस पूरी ख़ूबसूरती के बावजूद, महबूब की एक निगाह ने वफ़ा की हर कसमें तोड़ दी। यह इश्क़ की नश्वरता और भरोसे के टूटने का एहसास है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
